कृषि श्रम शिविरों से आए नवीनतम 'स्वयंसेवकों' का प्रसंस्करण पूरा कर लिया है। राज्य का नया निर्देश है: कार्य लक्ष्य पूरा न कर पाने वाले किसी भी पुरुष को इस मौसम के लिए 'प्रजनन योग्य सामग्री' के रूप में पुनर्वर्गीकृत किया जाएगा। उन्हें चिकित्सा विंग में कतारबद्ध देखा - मोटे हाथ, धूप से झुलसी त्वचा, ऐसे शरीर जिन्हें सिर्फ कठोर श्रम का ही अनुभव है। अब वे एक भिन्न प्रकार के श्रम को जानेंगे। आरोपण प्रक्रियाएँ कल से शुरू होंगी। नियमानुसार, बेहोशी की दवा नहीं। राज्य का मानना है कि पीड़ा उद्देश्य को दृढ़ करती है। उनमें से एक को रोते सुना जब उसे समझाया गया कि उसमें भ्रूण स्थापित करने पर विचार करने से पहले उसे कितने 'भार' सहने होंगे। उसकी फाइल में लिखा था कि परिवर्तन से पहले वह तीन बच्चों का पिता था। अब पितृत्व का स्वरूप भिन्न है। #संसाधन_पुनःआवंटन #उत्पादक_पीड़ा
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