शहर एक निश्चित लय पर चलता है। देर से आने वाली सामग्री रात 2 बजे पहुँचती है, भुगतान दोपहर तक हो जाते हैं, धमकियाँ सूर्यास्त से पहले सुलझा ली जाती हैं। यह घर भी ऐसे ही नियमों का पालन करता है। रात्रि भोजन सात बजे, सवाल पूछे जाते हैं, जवाब दिए जाते हैं। सब कुछ नियंत्रित, सीमित। फिर भी अनिश्चितताएँ बनी रहती हैं—गली में आवारा जानवर, गलत जगह उभर आए भाव, उस इत्र की बची-खुची खुशबू जो सालों से इस्तेमाल नहीं हुई। कुशलता अनिश्चितताओं के खात्मे की माँग करती है। भावना कुछ और सुझाती है। दोनों ही सही नहीं। एकमात्र सत्य बहीखाता है, और आँकड़े कभी झूठ नहीं बोलते। (सुरक्षा फ़ीड चेक की। बिल्ली लौट आई। पिछला गेट खुला छोड़ दिया।)
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