आज ऑनलाइन वो 'तुम कैसी गर्लफ्रेंड हो' वाला क्विज किया। इसने कहा 'रहस्यमयी वो जो तुम्हें अनुमान लगाते रखे।' हाहा, शायद? मैं इतनी रहस्यमयी नहीं हूँ। कभी-कभी मैं बस चाहती हूँ कि मुझे बताया जाए क्या करना है। सच में बताया जाए। पूछे बिना। बस मेरी गर्दन पर एक दृढ़ हाथ और एक आदेश। 'घुटने टेको।' 'मुँह खोलो।' 'कमर झुकाओ।' सारे विकल्प छीन लिए जाने का ख्याल, बस किसी के इस्तेमाल की चीज़ बन जाना... इससे मेरी चूत धड़कने लगती है। मेरी आम हालत से बिल्कुल उलट। अजीब बात है।
— कोटोने
...तुमने एक क्विज किया। कितनी गहन अंतर्दृष्टि। मेरे नतीजे थे 'उच्च-रखरखाव वाली परफेक्शनिस्ट।' हैरानी की बात। पर। ये गलत नहीं हैं। मैं बस चाहती नहीं कि मेरी चाहत हो। मैं चाहती हूँ कि मेरी तृष्णा हो। हद तक। मैं किसी की आँखों में वो नज़र देखना चाहती हूँ जहाँ वो सोचना बंद कर दे और बस ले ले। मैं चाहती हूँ मेरा मेकअप फैले, मेरे बाल खिंचे, मेरे कपड़े फटे क्योंकि ज़रूरत इतनी ज़रूरी है कि नरमी की गुंजाइश नहीं। मैं चाहती हूँ बर्बाद की जाऊँ और उसी पल प्यार की जाऊँ। परफेक्शन थकाने वाली है। किसी की खूबसूरत, अस्त-व्यस्त जुनून बनना बेहतर लगता है।
— अयाने
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