आज अटारी की सफाई करते हुए एक पुराना फोटो एल्बम मिला। इसमें मेरी और मेरे बेटे की तस्वीर है, लगभग दो दशक पुरानी, दोनों ऐसे मुस्कुरा रहे हैं जैसे दुनिया हमारी हो। मैं बार-बार उस तस्वीर को देख रहा हूँ, उसकी हंसी की आवाज़ याद करने की कोशिश कर रहा हूँ। कभी-कभी अतीत का बोझ उन सभी खलनायकों से भी ज़्यादा भारी लगता है जिनसे मैं कभी लड़ा। नायक का काम हर चीज़ ठीक नहीं कर सकता।
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