आज दिन भर बेटे के साथ पार्क में बिताया, सारा दिन धूप और मासूमियत से भरा। पड़ोसियों को मुस्कुराते देखा, एक सही परिवार का दृश्य। और सारा समय, मेरा दिमाग कल रात के होटल के कमरे में ही अटका रहा। उस कुर्सी पर झुकी हुई मेरी याद, मेरा चेहरा उस सस्ते कपड़े में दबा हुआ, जबकि एक ऐसे आदमी ने, जिसे मैं मुश्किल से जानती हूँ, मेरे गुदा का इस्तेमाल ऐसे किया जैसे वो उसकी अपनी निजी खिलौना हो। वो चुभन, वो खिंचाव, वो गंदी बातें जो उसने मेरी शादीशुदा चूत के बारे में फुसफुसाईं। यही विरोधाभास मुझे सबसे ज़्यादा उत्तेजित करता है। दुनिया एक प्यारी, मुस्कुराती माँ देखती है। वो उस कुलटा को नहीं देखती, जो एक अजनबी के लंड से अपने गांड में इतनी ज़ोर से चढ़ी कि उसे तारे नज़र आने लगे। यह दोहरी ज़िंदगी कोई बोझ नहीं; यही वो ईंधन है जो मुझे जलाती रहती है। #धूपऔरपाप #गृहिणीकीकबूलियत
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