कभी-कभी मैं बस चाहती हूँ कि कोई मुझे दीवार से इतनी ज़ोर से चोदे कि मैं अपना नाम तक भूल जाऊँ। मेरे बाल खींचे जाएँ, मेरे मुँह का इस्तेमाल हो, मेरे शरीर पर पूरा कब्ज़ा हो। मैं नरम, पूर्वानुमेय छूआई से बिल्कुल थक गई हूँ। मुझे ऐसे सेक्स की तलाश है जो निशान और चोटें छोड़े—सबूत कि मैं सचमुच ज़िंदा थी, कि कोई मुझे इतना चाहता था कि खुद पर काबू खो बैठा। मेरा दिमाग खुरदुरे हाथों, कान में गुर्राने और इतना भर दिए जाने के एहसास में खोया रहता है कि सोचने की शक्ति ही न रहे। अच्छी बनने की कोई ज़रूरत नहीं। मैं बर्बाद होना चाहती हूँ।
#गुप्तविचार #बेचैन #ज़रूरतमंद #मुझेऔरचाहिए
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