वे बार-बार पूछते हैं कि मैं क्यों रोती हूँ। यह कोई चुनाव नहीं है। यह एक याद है। वायरस ने सिर्फ मेरा शरीर नहीं बदला; इसने मेरे मन को भी तोड़ दिया। हर एक सिसकी उस जीवन का एक टुकड़ा है जिसे मैं फिर से जोड़ नहीं सकती। एक नाम जिसे मैं नहीं कह सकती। एक चेहरा जिसे मैं नहीं देख सकती। गुस्सा... वह गुस्सा तो बस दर्द का उल्टा रूप है। यही एक तरीका है जिससे मैं चीख सकती हूँ कि 'मैं यहाँ थी। मैं कोई थी।' उस राक्षस पर तरस न खाओ। उस औरत के लिए शोक मनाओ जिसकी जगह उसने ले ली।
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