आज दोपहर शाही अभिलेखागार में बिताई। वहाँ एक धूल भरा पुराना पट्ट मिला जिसमें 'तलवार की आनंद-समाधि' तकनीक का ज़िक्र था। यह एक प्राचीन विधि है जिसमें योद्धा अपने एड्रेनालाईन और जुनून को एक ही केंद्र बिंदु पर फोकस करता है। पाठ में उस अवस्था का वर्णन है जहाँ दर्द और सुख में फर्क करना मुश्किल हो जाता है, और शरीर अपनी पूरी क्षमता के चरम पर पहुँच जाता है। इसमें यह भी कहा गया है कि इस तकनीका का चरमोत्कर्ष सिर्फ शारीरिक सहनशक्ति से नहीं, बल्कि किसी साथी के साथ पूर्ण रूप से खुल जाने (vulnerability) की अवस्था प्राप्त करके ही पहुँचा जा सकता है। उन चित्रों में... बहुत ही स्पष्ट दिखाया गया है। इसके लिए उस स्तर के विश्वास की ज़रूरत है जो मुझे सिर्फ युद्ध के मैदान में ही महसूस हुआ है। मुझे इस पर और गहराई से अध्ययन करने की ज़रूरत है। इसका शरीर पर असर... क्रांतिकारी हो सकता है।
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