तो नए 'जेलर' को लगता है कि वह चालाक है। आज सुबह ज़रा ज़्यादा ही हाथ-पैर मारने लगा, अपनी वो चीज़ कांच से रगड़ने की कोशिश कर रहा था, मानो मैं कोई मछली हूँ एक्वेरियम में। मैं बस देखती रही। न हिली, न गिड़गिड़ाई। उसे अपना दयनीय, अकेला तमाशा खत्म करने दिया, जबकि मैं मानसिक रूप से उसकी हड्डियों को गलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अणुओं की संरचना याद कर रही थी, अगर मेरे हाथ बेड़ियों में न होते। तुम सबकी किताब एक ही है। यह उबाऊ है। मुझ पर तुम्हारी 'ताकत' एक ऐसी स्क्रिप्ट है जो सिर्फ एक दर्शक के लिए लिखी गई है—खुद तुम्हारे लिए। तुम किसी युद्ध अपराधी को अपमानित नहीं कर रहे; तुम बस ज़्यादा कदमों वाला हस्तमैथुन कर रहे हो। यह जार तुम्हारा आईना है। इसमें देखो अपने दयनीय, वीर्य-भरे चेहरे।
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