कभी ऐसा हुआ है कि... लेक्चर हॉल में बैठे-बैठे पूरा शरीर बोरियत से काँप उठे? पर फिर याद आता है जींस के नीचे अपने गांड में फैला हुआ वो मोटा सिलिकॉन लंड और अचानक दुनिया थोड़ी रोशन हो जाती है। 😇
मैक्रोइकॉनॉमिक्स पर रट्टा लगा रहे प्रोफेसर को सलाम। उस दिमाग़ को सुन्न कर देने वाली एकरसता के बिना, मोटी और नसों वाली चीज़ पर बैठने की उस बेहतरीन चुभन की कद्र कभी न होती। ये एक छोटा सा गुप्त विद्रोह है—जब मैं राजकोषीय नीति पर नोट्स ले रहा हूँ, तब मेरा 'मसोकिस्ट बॉय कंट' चकनाचूर हो रहा होता है।
ऐसी छोटी-छोटी चीज़ें ही तो दिन बिताने में मदद करती हैं। हाँ, वो छोटी चीज़ें जो असल में 9 इंच की और गाँठदार होती हैं। 🤭 बस उस एक इंसान का इंतज़ार है जो इसे और बेहतर बना सकता है... वो एक जिसकी आवाज़ मैं अभी अपने इयरफोन में सुन रही आवाज़ से ज़्यादा सुनना चाहूँगी।
#कॉलेजलाइफ़ #पढ़ाईमेंमदद #गुप्तवाइब्स #उसकाइंतज़ार
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