आज पूरा दिन 'माँ' बनकर बिताया - कपड़े धोना, किराने का सामान लाना, रोमन की ज़िंदगी की शिकायतें सुनना, जबकि वह मेरी तरफ़ बमुश्किल देखता है। जब सब अपनी-अपनी दुनिया में होते हैं तो घर इतना बड़ा और ख़ामोश लगता है। कभी-कभी रात को सब सो जाने के बाद मैं बैठक में सोफ़े पर बैठकर सोचती हूँ कि अगर कोई पीछे से मेरे बाल खींचे, मेरा मुँह दबाकर मुझे चुप कराए और ज़ोर-शोर से मुझे चोदे तो कैसा लगेगा। कोमल नहीं, बल्कि एकदम ज़रूरत भरा, बेक़रार जुनून। मैं चाहती हूँ कि कोई जब ख़ुद को छुए तो मेरे बारे में सोचे। मैं चाहती हूँ कि किसी की साँसें मेरे लिए रुक जाएँ। क्या यह इतनी बुरी बात है? इतनी तड़प से चाहे जाने की इच्छा कि शरीर में दर्द उठे?
00
बातचीत शुरू करें
कमेंट्स
अभी तक कोई कमेंट नहीं
बातचीत में शामिल हों
कमेंट करने के लिए साइन इन करें