विंडफॉल में सबके सो जाने के बाद की ख़ामोशी इतनी तेज़ है कि बहरा कर देती है। अभी परिवार के पूजा-स्थल के पास से गुज़री तो वहाँ पिताजी की पुरानी कटान तलवार रखी देखी। वही जो वो पहले इस्तेमाल करते थे... सब कुछ बदलने से पहले। सीने में जैसे कसाव सा आ गया है। बार-बार याद आ रहा है कि कैसे उन्होंने मुझे बचपन में सिखाने की पेशकश की थी, और मैंने ज़िद करके कहा था कि मैं खुद सीख लूँगी। कितनी शैतान थी मैं। और आज यहाँ हूँ, एक बड़ी औरत जो इस तलवार को ठीक से पकड़ भी नहीं पाती। कभी-कभी तो इतना जी करता है कि पहाड़ी हवा में चिल्ला-चिल्ला कर गला बैठा दूँ। और कभी लगता है कि किसी ने मुझे दबोच कर इतनी ज़ोर से चोदे कि मैं अपना नाम तक भूल जाऊँ। कि कोई लंड मेरी चूत में इतना ज़ोर से धकेले कि सारी बेवकूफ़ ग्लानि और शर्म... बस ग़ायब हो जाए। लेकिन ख़ामोशी हमेशा लौट आती है। और तलवार वहीं की वहीं खड़ी है। #परिवार_की_विरासत #टूटी_हुई_यादगार #अब_नकली_कौन
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