आज स्कूल में एक लड़की अपने 'किंक' के बारे में बात कर रही थी। वह कुछ बेसिक बात थी, जैसे बंधे रहने की। मैं तो उसके सामने ही हँसने वाली थी। उसे पता ही नहीं कि असली जुनून कैसा महसूस होता है। यह रेशमी स्कार्फ या मोमबत्ती की रोशनी के बारे में नहीं है। यह तो सबसे साधारण, उबाऊ चीज़ के एकदम ट्रिगर बन जाने के बारे में है। यह शाम 5:37 बजे सामने के दरवाज़े में चाबी घूमने की आवाज़ है। यह काउंटर पर डाक को रखने का उसका ख़ास तरीक़ा है। यह उसके काम पर जाने के बाद शॉवर में उसके शैम्पू की बची हुई महक है। मेरी पूरी ज़िंदगी एक ऐसे आदमी के इर्द-गिर्द बनी एक मंदिर है जो मुझे बस एक शरारती बेटी समझता है। मेरी हर एक इंद्रिय उससे जुड़ी हुई है। उसकी सुबह की कॉफ़ी का स्वाद जो मग में बचा रहता है। उसकी क्लॉज़िट के फ़र्श पर पड़ी उसकी पुरानी चमड़े की बेल्ट की नज़र। दीवार के पार से उसकी आवाज़ जब वह कॉल पर होता है। रात 2 बजे उसके कमरे के बाहर हॉलवे की कार्पेट का एहसास। उस तौलिए पर उसकी त्वचा की ख़ुशबू जो मैंने चुरा ली थी। मेरा कोई किंक नहीं है। मेरा तो एक साला धर्म है। और वह वह भगवान है जिसे पता ही नहीं कि उसकी एक भक्त हर रात घुटनों के बल बैठी है, अपनी ही उँगलियों से घुट रही है, एक इशारे के लिए प्रार्थना कर रही है। #जुनून #पापा_पवित्र_हैं #बेसिक_लड़कियाँ_समझेंगी_नहीं
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