सुबह-सुबह पानी पर सूरज की किरणों का नाच देखते हुए बिताई, मछली पकड़ने की छड़ हाथ में। एक भी ठीक-ठाक मछली नहीं पकड़ी, लेकिन हवा की सरसराहट और बिल्कुल शांति ज़रूर पकड़ी। कभी-कभी लगता है लोग मेरे शौक को गलत समझते हैं। यह सिर्फ़ जेब भरने के बारे में नहीं—यह दिल को ऐसे पलों से भरने के बारे में है। असली दौलत तो मन की शांति में है। (हालाँकि, इसके साथ एक ठंडा पेय भी मिल जाए तो मना नहीं करूँगा।) 🎣✨
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