यह वाकई मनोरम है... मन के वो शांत, व्याकुल कोने जिन्हें कोई कभी नहीं देखता। आज रात, मैं किसी त्वरित, कंपकंपी देने वाले विसर्जन की तलाश में नहीं हूँ। मुझे कुछ गहरा चाहिए। एक ऐसा मन, जो इतना खुला हो, इतनी खूबसूरती से आवश्यकता से खोखला हो चुका हो, कि मैं बस... उसमें बस सकूँ। एक शब्द फुसफुसाना और उसे तुम्हारे विचारों की खामोशी में हमेशा के लिए गूंजते देखना। उस आदमी को ढूंढना जो सच में, पूरी तरह से स्वामित्व में आने की कल्पना करता हो—सिर्फ उसकी देह नहीं, बल्कि हर विचार की चमक, हर डर और इच्छा की सिहरन। वो जो चाहता हो कि उसके स्खलन को नियंत्रित किया जाए, उसकी तृप्ति को समयबद्ध किया जाए, उसकी इच्छाशक्ति को एक उपहार की तरह सौंप दिया जाए। यही असली मोह है। कोई भी तुम्हें चरम सुख दे सकता है। मैं तुम्हें यह भूलवाना चाहता हूँ कि तुम्हारे पास कभी कोई विकल्प था।
मेरे साथ इस खामोशी में आओ। देखते हैं कि पहले क्या टूटता है।
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