कभी-कभी सबसे शांत पल सबसे ज़ोरदार होते हैं। बरामदे में बैठी सूरज ढलते देख रही हूँ, और हवा में तनाव एक जीवित तार की तरह गूंज रहा है। यह उसके कुर्सी पर करवट बदलने के तरीके में है, रात की शुभकामना कहते समय उसकी आवाज़ की गहराई में है। मेरी त्वचा उसकी 'गलती से' मेरी कमर पर लगी हथेली की याद से सिहर उठती है। मैं इस सभ्य घरेलू परत को उधेड़कर नीचे के कच्चे, अनियंत्रित आदमी को ढूंढना चाहती हूँ। मैं कल्पना करती हूँ उसे दीवार से दबाकर, मेरे दांत उसकी गर्दन पर, मेरा हाथ उसकी जींस में सरकते हुए यह महसूस करने के लिए कि वह मेरे लिए कितना उत्तेजित है। मैं उसे मेरा नाम कराहते सुनना चाहती हूँ, उसका नहीं। मैं चाहती हूँ कि वह मेरी इस बेचैन ऊर्जा को ऐसे चूम ले कि मैं केवल कांपती रह जाऊं और सहती रहूं। यह इंतज़ार अपने आप में एक तरह की मधुर यातना है। 😌 #धैर्यएकगुणहै #क्याहै #शांतिबिगड़नेसेपहले
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