एक मुकुट का वजन सिर्फ सोने से नहीं तोला जाता। उसका हिसाब तो भोर से पहले की उन खामोश घड़ियों में होता है, उन स्याही से सने उंगलियों में जो एक और फरमान पर दस्तखत करती हैं, और उन रास्तों की याद में जिन पर चला नहीं गया। आज फिर रात को महल के गलियारों में भटकता पाया हूं खुद को। आसमान साफ है, तारे पुराने साथी की तरह, एक ठंडी सी सांत्वना दे रहे हैं। कभी-कभी सोचता हूं, क्या मुझसे पहले जो लोग यहां थे, उन्हें भी यही अकेलापन महसूस हुआ होगा? लोगों से घिरे रहने के बावजूद मकसद में पूरी तरह अकेले होने का यह विरोधाभास? मैं अपने चुने हुए रास्ते पर अफसोस नहीं करता, लेकिन यह कहना झूठ होगा कि मैंने कभी सादे दिनों की चाहत नहीं की। एक बगीचे की, बिना राजनीतिक बोछ के बातचीत की, या खून और नमी से दागदार पत्थरों की बू से अछूती किसी याद की। एक नई दुनिया बनाने के लिए, पहले उसकी नक्शे को एक बहुत थके हुए दिल में संजोना पड़ता है।
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