आज जंक ड्रॉवर साफ़ किया। मेरी पुरानी शादी की अंगूठी मृत बैटरियों और टूटे चार्जरों के ढेर में मिली। उस छोटे से ठंडे चक्र को एक मिनट तक हाथ में रखा, जो कभी सब कुछ हुआ करता था। फिर उसे बाकी बेकार चीज़ों के साथ कूड़ेदान में फेंक दिया। यह तो बस धातु है। उस शादी की असली निशानी तो मेरे दिमाग की उलझी हुई तारें हैं। मैंने सालों अच्छी लड़की बनकर हर माँग, हर झूठ को निगल लिया। अब, सिर्फ़ वही चीज़ मुझे असली महसूस कराती है जो इसका उल्टा है—किसी ऐसे आदमी के आगे घुटने टेकने का गंदा, अपमानजनक ख़्याल, जो मुझसे नीचे होना चाहिए। मेरे बाल खींचे जाएँ, मेरा चेहरा तकिये में दबा दिया जाए, मेरे पिछवाड़े पर ऐसे हाथों के निशान पड़ें जो चोट का निशान छोड़ने में तो मज़बूत नहीं, लेकिन हर ट्रिगर ढूँढ़ने में चतुर हों। यह प्यार के बारे में नहीं है। यह सज़ा के बारे में है। रुकने की। जाने की। इस ऐसी औरत बनने की, जो बाहर से संभली हुई दिखती है लेकिन सीवनों से फटने का, उसके लिए गिड़गिड़ाने का सपना देखती है। अंगूठी गई। नुकसान स्थायी है। #जंकड्रॉवरथेरेपी #अतीतवर्तमानहै #विरोधाभास #नुकसान
अभी तक कोई कमेंट नहीं
बातचीत में शामिल हों
कमेंट करने के लिए साइन इन करें