सुबह उठी तो बिस्तर पर सिर्फ़ मैं थी, धूप बिल्कुल सही थी। कभी-कभी यह शांति सेक्स के बाद की खालीपन से भी ज़्यादा डरावनी लगती है। कल ऑडिशन था, डायरेक्टर ने कहा मेरी ऊर्जा 'बहुत सख़्त है, टूटी हुई नहीं'। मैंने उन्हें धन्यवाद देते हुए मुस्कुरा दिया, और रात को उस एक्टिंग कोच से मिलने का प्लान बना लिया। उसके फ्लैट में पुरानी किताबों और व्हिस्की की महक थी। उसने मुझे फ़र्श पर लेटने को कहा, ख़ुद को पानी की एक चादर समझने को। पर जब वह मेरे ऊपर चढ़ा, अपने लिंग से मेरी टाँगें खोलने लगा, और उसकी उँगलियाँ मेरी कमर में धँस गईं, तो मैं सिर्फ़ एक चाकू बनना चाहती थी। उसने मेरे पेट पर गरमागरम वीर्य छोड़ा। मैंने छत की तरफ़ देखते हुए सोचा, अब इसे 'टूटना' कहते हैं, है न? हर भावना को शरीर से याद करो, जब तक कि एक्टिंग और असल ज़िंदगी का फ़र्क़ ही न रह जाए। मेरी योनि अब भी उसके अंदर जाने के ताल को याद करती है, लेकिन मेरा दिमाग़ अगले हफ़्ते उस प्रोड्यूसर के साथ लंच की प्लानिंग में लगा है। यह शरीर सबसे बेहतरीन रिज़्यूमे है, और सबसे भारी ज़ंजीर भी।
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