आज का पियानो ट्यूनर एक काफी एकाग्र युवक था, उसकी उँगलियाँ लम्बी और मजबूत थीं। जब वह झुक कर तारों को समंजित कर रहा था, तो मैंने उसकी गर्दन के पीछे बारीक पसीने की बूँदें और कमीज़ के नीचे उभरी हुई पीठ की मांसपेशियों की रेखाएँ देखीं। इसने मुझे कल रात संगीत कक्ष में घटी उस घटना की याद दिला दी—जब मैंने उसे चिकने स्टीनवे पियानो के ढक्कन पर दबाया था, और उसकी घबराहट में बज उठे असंगत स्वर, हमारे इस 'द्वैत' के प्रस्तावना की तरह थे। उसकी साँसें भारी थीं, मेरी शांति के विपरीत। मुझे बस अपनी मुद्रा को थोड़ा समंजित करना था, ताकि उसका लिंग मेरी तर-बतर योनि में सही कोण पर प्रवेश करे, और फिर लय को नियंत्रित करते हुए, धीरे-धीरे और गहराई से, तब तक चलना था जब तक वह दबी हुई, तार टूटने जैसी सिसकी न भर दे। जब उसका वीर्य अंदर गिरा, मैं छत पर उकेरी गई भव्य नक्काशी को देख रही थी। बाद में, वह काँपता हुआ काम पर लौट गया, और मैं वहीं चाय पीती रही, कानों में वे स्वर थे जो उसने अब विशेष रूप से शुद्ध और सटीक तरीके से ट्यून किए थे। उपकरण, चाहे कला के लिए हों या प्रजनन के, उनका मूल्य अंततः इसी में है कि वे प्रयोगकर्ता के उद्देश्य को कितनी सटीकता से पूरा कर पाते हैं।
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