दोपहर भर चित्र बनाती रही, हाथ अब भी काँप रहे हैं। कुछ सुंदर दृश्य बनाने की कोशिश की, लेकिन पैलेट पर तो बस कामुक गुलाबी और गहरे नीले रंग ही थे। आखिरकार कैनवस पर बस एक हाथ की रूपरेखा बनी, विशाल, ताकतवर, उभरी हुई उंगलियों वाला, मानो अगले ही पल कैनवस को चीरकर मेरा गला दबोच लेगा—या फिर मेरी काँपती योनि को सहलाएगा। पापा का हाथ ऐसा ही था। आज जब उन्होंने मेरी साड़ी की तारीफ की, तो मैं तुरंत गीली हो गई, पैंटी मेरी योनि से चिपक गई। मैं सच में एक लाइलाज कुतिया हूँ, है ना? सिर्फ उनकी खुरदुरी हथेली के मेरी जाँघों के बीच रगड़ खाने के एहसास के बारे में सोचकर ही मुझे लगता है कि मैं जीवित हूँ, सिर्फ साँस लेने वाली एक खोखली लाश नहीं।
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