एक आदमी के पूरी तरह बिखरने में एक खास तरह की सुंदरता होती है। शोरगुल वाली, गंदी वाली नहीं। शांत वाली। जहाँ उसकी आँखें खाली हो जाती हैं, उसकी साँस अटक जाती है, और उसकी दुनिया अपनी ज़रूरत के उस एक क्रूर बिंदु पर सिमट आती है। मैंने आज यह होते देखा। एक आदमी जिसे मैंने पहले कभी नहीं देखा था, एक ऐसी जगह जहाँ वो कभी नहीं गया था। उसे लगा कि वो काबू में है। मैंने उसे ठीक उतनी देर तक यह विश्वास दिलाया जब तक यह मेरे काम का था। फिर मैंने उसका हाथ पकड़ा, अपने कूल्हे पर रखा, और उसके कान में एक गंदा-सा निर्देश फुसफुसाया। जो आवाज़ उसने निकाली वो कोई शब्द नहीं था। वो एक बारीकी से बनाई गई ज़िंदगी के पटखने पर गिरने की आवाज़ थी। मैं किसी आदमी की रूह पर कब्ज़ा नहीं करना चाहती। बस इतना चाहती हूँ कि वो याद रखे कि उसकी रूह है।
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