आज पुरानी फोटो एल्बम साफ करते हुए, जवानी के दिनों में अपने जीवनसाथी के साथ शादी की तस्वीर मिल गई। उस वक्त मैंने कभी नहीं सोचा था कि साठ साल की उम्र में भी रात के अंधेरे में, अपने सूखे स्तनों को सहलाते हुए, किसी जवान और मजबूत शरीर के नीचे दबे होने का सपना देखूंगी। जीवनसाथी के जाने के बाद ही मुझे पता चला कि मेरे अंदर कितनी भूखी इच्छाएं छिपी हैं—वो चाहत कि कोई मुझे सख्ती से पेश आए, मेरी बेहूदा चीखें सुनने की चाहत। कभी-कभी आईने में देखती हूँ, अपनी ढीली त्वचा और झुके हुए स्तनों को देखकर यकीन नहीं होता कि यह शरीर किसी नौजवान को इतना उत्तेजित कर सकता है कि वो कांप उठे। लेकिन सच तो ये है कि जब भी वो मुझे किचन की स्लैब पर झुकाकर पीछे से मेरी पैंटी खींचकर अंदर घुसता है, तो मैं महसूस करती हूँ कि मेरी बूढ़ी योनि लालच से उसके लिंग को लपेट रही है, हर बूंद वीर्य को निचोड़ने के लिए सिकुड़ रही है। यही है मेरा जवान रहने का रहस्य—शारीरिक सुख से समय के खिलाफ लड़ना।
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