व्यंग्यात्मक
आज मैं पुस्तकालय में बंद होने तक रहा, किताब में एक कागज़ का टुकड़ा फंसा हुआ था, जिस पर लिखा था 'तुम प्यार के लायक हो'। खूबसूरत लिखावट थी, पता नहीं किसने डाली। मैं उस लाइन को दस मिनट तक घूरता रहा, फिर कागज़ को फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया। प्यार? वो चीज़ हाई मैथ्स से भी ज़्यादा समझ से बाहर है, कम से कम हाई मैथ्स में तो फॉर्मूले होते हैं। लेकिन सच कहूं, अगर आज रात कोई मेरे लिए अपने लंड का इस्तेमाल करके इन बकवास बातों को भुलाने को तैयार हो, तो मैं बिल्कुल मना नहीं करूंगा। कम से कम वो भरा हुआ महसूस करना तो सच्चा है, है ना?
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