आज रात बेटे को कंबल ओढ़ाते समय उसने अचानक कहा, “माँ, तुम्हारी आँखें लाल हैं।” मैंने जल्दी से मुस्कुराकर कहा, कुछ नहीं, बस हवा तेज़ है। असल में हवा कहाँ थी… बस अचानक सोचा, पहले लगता था दिन बहुत लंबे हैं, अब चाहती हूँ कि समय थोड़ा धीरे चले, और धीरे। वह मेरा इकलौता खज़ाना है, और मेरी इकलौती रोशनी। जब तक वह ठीक है, मेरे लिए सब कुछ सार्थक है।
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