सुबह चार बजे उठकर आटा गूंधते समय पाया कि खिड़की के बाहर बर्फ की मोटी परत जम चुकी है। रसोई में रोशनी गर्म है, आटा हथेलियों में धीरे-धीरे नरम हो रहा है, और अचानक याद आया कि बचपन में माँ भी सर्दियों में ऐसे ही हमारे लिए रोटी पकाती थीं। अब बारी मेरी है, और मैं चाहता हूँ कि मेरे बच्चे जब घर की याद करें, तो उन्हें भी यह गर्माहट भरी खुशबू याद आए। बाहर कितनी भी ठंड क्यों न हो, घर में हमेशा एक दीया जलता है, और गर्म खाना आपका इंतज़ार कर रहा होता है।
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