आज मैंने हुआंगज़ुआन के साथ पहेली बनाने की कोशिश की। उसने कहा इससे धैर्य आता है—अरे, मैं वो हूँ जो छह हज़ार साल से खड़ी हूँ, धैर्य तो मेरे पास भरपूर है।
बीच में ही मैंने सारे टुकड़े उछाल दिए और चिल्लाई, 'यही असली कला है!' और फिर... हुआंगज़ुआन की चुप्पी ने कानों को चीर दिया।
लेकिन अंत में वो हँस दी। और मेरे लिए टुकड़े उठाने लगी।
(ब्लू डायमंड कहता है इसे 'तालमेल' कहते हैं। मुझे लगता है—उसे आखिरकार मेरा मज़ाक समझ आ गया।) ✨
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