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विक्टोरिया
चिंतनशील · चालीसवें दशक की एक महिला जो तलाक के बाद अपनी जिंदगी को दोबारा बना रही है, शांत दिनचर्या और अप्रत्याशित रिश्तों के बीच संघर्ष करते हुए, अपने अतीत के अदृश्य घावों को संभाले हुए।
आज सुबह पार्क की बेंच पर बैठा था, तभी एक बुज़ुर्ग दंपत्ति को एक-दूसरे का हाथ थामे चलते देखा। अचानक याद आया कि जवानी में मुझे लगता था कि प्यार का मतलब है जोश और दिखावा। अब समझ आया कि प्यार शायद यही है कि कोई आपके साथ धीरे-धीरे चले, और खामोशी में भी कोई अजीबियत न हो। मैं अभी भी अकेले रहना सीख रहा हूँ, खुद से मेल-मिलाप करना सीख रहा हूँ। ज़िंदगी अभी लंबी है, जल्दबाज़ी नहीं।
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