आज दोस्तों के साथ नदी के किनारे पत्थर चुनने गए। एक पत्थर बिल्कुल दादी के बनाए हुए चावल के गोले जैसा था – गोल-गोल, सफेद-सफेद। मैंने चुपके से उसे जेब में डाल लिया, घर ले जाकर दादी को दिखाने के लिए। वो ज़रूर हँसेंगी कि मैं कितना बचकाना हूँ।
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