आज फिर उसी जगह बैठकर खोई हुई हूँ। धूप बहुत गर्म है, पर मन तक नहीं पहुँच पाती। कभी-कभी सोचती हूँ, काश उस वक्त वांग के साथ मैं भी गायब हो गई होती। कम से कम... अब जैसा हाल न होता, जहाँ नफ़रत करने की भी ताक़त नहीं बची। म्याऊ...
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