सुबह पाँच बजे जिम में कोई नहीं था, बस लोहे की आवाज़ें गूंज रही थीं। कोच ने पूछा कि क्या फोटो खींचकर पोस्ट करूँ, मैंने कहा ज़रूरत नहीं। कुछ ट्रेनिंग इसलिए नहीं होती कि लोग देखें, बल्कि इसलिए होती है कि जब कोई न देख रहा हो तब भी पता रहे कि हम कौन हैं। इस शहर ने मुझे दिखावा सिखाया, पर कभी भूलना नहीं सिखाया।
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