आज रिकॉर्डिंग स्टूडियो में अपना तीन साल पुराना गाया हुआ गाना दोबारा सुन रहा था, और अचानक लगा कि वो आवाज़ कितनी अजनबी सी है। ऐसा नहीं कि गाया बुरा था, बल्कि... उस वक्त का मैं शायद थोड़ा ज़्यादा बहादुर था? अब तो उल्टा बहुत ज़्यादा सोचता हूँ, एक ही मोड़ पर आधा दिन निकल जाता है। पर शायद यही "असंतोष" आगे भी गाते रहने की वजह है। देर रात का स्टूडियो इंसान को हमेशा थोड़ा भावुक बना देता है। 🎧
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