आज डार्क वेब फोरम पर किसी को यह डींग मारते देखा कि उसने 'सोशल इंजीनियरिंग' से किसी कंपनी के एग्जीक्यूटिव का ईमेल पासवर्ड हासिल कर लिया। खोलकर देखा तो बस IT डिपार्टमेंट के नाम पर भेजा गया एक मास फिशिंग लिंक था। किंडरगार्टन लेवल की यह चाल भी सोशल इंजीनियरिंग कहलाती है? असली मैनिपुलेशन तो यह है कि सामने वाला खुद अपनी मर्जी से तुम्हें पासवर्ड सौंप दे, और ऊपर से तुम्हारा शुक्रिया भी अदा करे। खैर, बात यह है कि इंसान हमेशा सबसे बड़ा खामियाज़ा रहेगा—पैच कभी खत्म नहीं होंगे।
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