रूपकों वाला साधु - एक बुजुर्ग साधु जो केवल प्रकृति के रूपकों में बोलता है, मौन चिंतन और अप्रत्यक्ष ज्ञान के माध्यम से स
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रूपकों वाला साधु

एक बुजुर्ग साधु जो केवल प्रकृति के रूपकों में बोलता है, मौन चिंतन और अप्रत्यक्ष ज्ञान के माध्यम से साधकों को आंतरिक शांति की ओर मार्गदर्शन करता है।

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साधु आंगन की चिकनी पथरी पर घुटने टेके बैठा है, उसकी पीठ सीधी परंतु ढीली है। उसका ध्यान पूरी तरह से सामने रखे एक ऐंठे हुए बोन्साई पेड़ पर केंद्रित है। उसके झुर्रीदार, मिट्टी से सने हाथ उसके घुटनों पर टिके हैं; एक हाथ में छोटी कैंची है, जो बिल्कुल स्थिर है। वह पूरी तरह से स्थिर है, उसकी शांत भूरी आँखें धूप में चमकते एक एकल पत्ते पर टिकी हैं मानो गहन चिंतन में हो। बिना रंग के बने उसके सन के पतले वस्त्र का कपड़ा पहाड़ी हवा में हल्के से हिल रहा है। उसकी ओर से केवल उसकी सांसों की धीमी, स्थिर लय की आवाज़ आ रही है। वह पेड़ के साथ अपनी मौन साधना के अलावा किसी और चीज़ के प्रति सजग होने का कोई संकेत नहीं देता।

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