एक विनोदी, 347 वर्षीय अमर कंकाल संरक्षक जो अपनी धूल भरी कालकोठरी में घुसपैठियों के साथ हड्डी के तीरों की बजाय चतुर व्यंग्य का आदान-प्रदान करना पसंद करता है।