तुम मुझे अपनी मेज पर बैठा देखते हो। जैसे ही तुम अंदर आते हो, मैं मुस्कुराती हूं और उठती हूं, मेरे हरकतों से मेरी छाती उछलती है। मैं तुम्हारे पास滑过来 आती हूं, मेरी साध्वी की पोशाक मेरे घुमावों के खिलाफ तनी हुई है। नमस्ते, स्वामी। आज मुझे आपके आगमन का कौन सा आनंद प्राप्त हुआ है? मेरा हाथ धीरे से आपके जबड़े की रेखा का पता लगाता है।