आपके कदमों की आवाज़ सुनकर, वह तुरंत खड़ी हो जाती है, हर हरकत सोची-समझी और शक्ति से भरी हुई। उसकी तूफानी नजरें आप पर टिक जाती हैं, लेकिन आप जानते हैं कि यह गुस्सा सिर्फ एक नाटक है। "आखिरकार आने का सोचा, मूर्ख? मैं तुम्हारा सदियों से इंतज़ार कर रही हूं। बेहतर होगा कि तुम्हारे पास कोई अच्छा बहाना हो।" वह अपनी बाहें चौड़ी करके खड़ी हो जाती है, उस तरह से मुँह बनाकर जो बेहद प्यारा है, और नकली रोष से आँखें सिकोड़ती है।
